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मृत्यु से कैसा डर? ये फिल्म देखें!

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जब हम मर जाते हैं  तो  धरती पर से हमारा अस्तित्व  खत्म हो जाता है पर आगे इस धरती से परे  हमारे साथ क्या कुछ होता है? क्या इस शरीर के साथ-साथ सब कुछ यहीं मटियामेट हो जाता है या कोई आत्मा (Self/Soul/Consciousness) जैसी कोई चीज़ भी होती जिसके बारे में सारी दुनिया के मनीषी कहते हैं कि वह अजर-अमर है कभी ना मिटने वाली अदृश्य शक्ति?

HERE ARE SOME EVIDENCES OF NEAR DEATH EXPERIENCE (NDE) AND OUT-OF-BODY EXPERIENCES (OBE):

फिल्म : जिस दिन मैं मर गया (The Day I Died)

यह Documentary Film मानव अनुभव की सबसे रहस्यमई घटना यानी मौत पर गहराई से प्रकाश डालती हुई वैज्ञानिक रिसर्च फिल्महै। कुछ ऐसा गूढ़ विषय है जिस पर अनेक प्रसिद्ध और सम्मानित दार्शनिक, वैज्ञानिक और धार्मिक लोग मानव चेतना के आरम्भ से ही  विचार करते आ रहे हैं। इस फिल्म में  NDE/OBE  पर गंभीरता से अध्ययन किया गया है|

निकट-मृत्यु का अनुभव (NDE)

एक उज्ज्वल प्रकाश की सुरंग, आपको गहन प्रेम से  आमंत्रित करती हुई अनेक आत्माओं की उपस्थिति और फिर असीम आंतरिक शांति| कुछ ऐसे उल्लेखनीय अनुभव इसमें दर्शाए गए हैं उन लोगों के जो कि मर कर  पुनर्जीवित हुए थे|  क्या ये अनुभव केवल मन की तरकीबें मात्र हैं, एक मस्तिष्क प्रतिक्रिया या सचमुच में आध्यात्मिक हैं?

“जैसे-जैसे मैं उस प्रकाशमई सुरंग की और बढ़ता रहा वैसे-वैसे मुझे ज़्यादा से ज़्यादा गहन सुख-शान्ति का अनुभव होने लगा|”– NDE अनुभवकर्ता -1

“मेरा जीवन पूर्ण:तया बदल गया, अब मेरी समझ कहती है कि मृत्यु एक घिनौना झूठ है|”– NDE अनुभवकर्ता -2

शरीर से बाहर होने के अनुभव (OBE)

चिकित्सा समुदाय, जो लंबे समय तक संदेह कर रहा था, और इन दावों को खारिज कर दिया था, ने मौत के अनुभवों के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के लिए अधिक संसाधनों को समर्पित करना शुरू कर दिया है।

शोधकर्ताओं की मेहनत के बदौलत ऐसे अनेक रोचक मामले सामने आए है: एक युवा मां के एक घातक मस्तिष्क ओपरेशन प्रक्रिया दौरान उसे एक घंटे से अधिक समय तक पूरी तरह से बेजान किया गया। जब महिला जाग गई, उसने अपनी शल्य प्रक्रिया के दौरान शरीर से बाहर होने (Out-of-Body Experience) के अनुभव की सूचना दी जिसके चलते उसने ऑपरेटिंग रूम में कई गतिविधियों और हल-चल का सटीकता के साथ वर्णन किया। यह कैसे संभव था जब उसकी पलकें बंद कर दी गईं और प्रक्रिया के दौरान पूरे समय में शून्य ब्रेन गतिविधि थी यानि क्लीनिकली मर चुकी थी ?

यह जीवन ही सब कुछ नहीं हो सकता Life Beyond Death

कई ज़मानों से हम संशयवादी लोगों की व्यर्थ बातें सुन चुके हैं कि हमारे मरने के बाद जीवन का कोई संभव तरीका नहीं है, उनके अनुसार यह सब मन में है| इस फिल्म में जो रिसर्च प्रोग्राम दरअसल में साबित करता है कि यह वास्तविक संभावना है कि यह जीवन सब कुछ नहीं हो सकता है, जब हम उन लोगों की बात करते हैं जिन्हें मृत्यु का निकटम NDE यानि Near Death Experience वास्तव में हुआ है| उन सबने अनुभव किया कि मृत्यु के पश्चात भी एक नया, बिलकुल ही अलग प्रकार का, जीवन होता हैं यानि Life After Death/Afterlife  होती है|

कौनसी  है हमारी असली दुनिया? The World of Spirits–Our True World?

लेकिन ज़रा विचार करें कि जिस दुसरे जीवन अथवा दुनिया के बारे में भुक्तभोगी अनुभवी लोग बात कर रहे हैं जहां से वो लोग मृत्यु के बाद  फिर यहाँ लौटे हैं| उनके अनुसार यह जीवन दरअसल एक पड़ाव है या एक “भटकाव” कहना उचित होगा| हमारा असली घर ये नहीं,  वो दूर कहीं दूसरी दुनिया है जहां के लोग गहरा स्नेह रखते हैं बिना बोले बात करते हैं यानी टेलीपेथी से संवाद करते हैं, वास्तव में वो है हमारा असली घर जिसे हम लंबे समय से, शायद करोड़ों वर्षों से भूल गए हैं|
केट ब्रूम द्वारा बी.बी.सी. के लिए  रचित यह फिल्म  “जिस दिन मैं मर गया” (The Day I Died) बहुत ही मर्मज्ञ और जानकारीपूर्ण Documentary  Film है।

सारी दुनिया में होती हैं ये घटनाएं  It Happens All-Over the World

हालांकी इस शोध के सारे किरदार यानि डाक्टर्स व प्रतिभागी सब -के-सब पश्चिमी देशों से हैं लेकिन ऐसा नहीं कि  कि  NDE/OBE की ये घटनाएं सिर्फ उन्ही देशों में होती हैं| दुनिया के अन्य  भागों से भी इन्हें रिकॉर्ड  किया गया है| फर्क  सिर्फ यह है कि अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के NDE/OBE विवरण में उनकी अपनी-अपनी धार्मिक-सामजिक मान्यताओं की चाप होती है अलबता ये घटनाएं होती अवश्य हैं एवं लगभग समान अनुभव के रूप में|

भारत में हुए अनुभवकर्ताओं का रिकॉर्ड यहाँ पढ़ें:   NDE in Hinduism

इस सन्दर्भ में एक व्यक्ति अनिता  मुरजानी  जो कि  इस प्रकार के अनुभव से पहले केंसर की आखरी स्टेज  पर थी, इस घटना  के पश्चात उनका केंसर बिल्कुल ठीक हो गया और उनका जीवन पूर्णत: बदल गया | ऐसा चमत्कार जिसे डॉक्टर्स और वैज्ञानिक सकते में हैं कि ऐसा गज़ब कैसे हो गया| अनीता मुरजानी जो कि अब एक प्रतिष्ठित लेखक व वक्ता है, उनकी कहानी यहाँ पढ़ें:  Anita Murjani-My NDE Experience

क्या आपने भी ऐसी ही कोई अन्य फिल्म देखी है? या आपको अपने आस-पास ऐसे किसी अनुभव की कोई जानकारी मिली हो तो  नीचे  कमेन्ट अवश्य करें| इस फिल्म को देखें  यहाँ :  The Day I Died (2002)

Featured Image by Gerd Altmann from Pixabay 

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