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युद्ध की कला 2: युद्ध छेड़ना

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युद्ध का खर्चा व अभियान का लंबा खींचना भारी पड़ेगा

सून त्ज़ु ने अध्याय 2 में कहा है : युद्ध के संचालन में, जहाँ मैदान में एक हजार तेज रथ होते हैं, उतनी ही संख्या में भारी रथ भी होते हैं, और एक लाख बख्तरबंद सैनिक होते हैं। एक हजार दिन के लिए पर्याप्त खाद्य-राशि के साथ, घर खर्च और युद्ध क्षेत्र का खर्च, मेहमानों के मनोरंजन सहित, गोंद और पेंट जैसी छोटी वस्तुएँ, और रथ और कवच पर खर्च की जाने वाली रकम, प्रति दिन एक हजार तोला चांदी तक पहुंच जाएगी। 100,000 पुरुषों की सेना को एकत्र करने की ऐसी लागत आती है।

जब आप वास्तविक लड़ाई में संलग्न होते हैं, यदि जीत प्राप्त होने में देर होती है तो पुरुषों के हथियार भोथरे हो जाएंगे और उनकी ललक नम हो जाएगी। यदि आप एक शहर की घेराबंदी करते हैं तो आप अपनी ताकत को समाप्त कर देंगे। यदि अभियान को लंबा बढ़ाया जाता है, तो राज्य के संसाधन युद्ध  हेतु पर्याप्त नहीं होंगे। अब जबकि आपके हथियार भोथरे हो जाते हैं, आपका उत्साह ढीला पड़ जाता है, आपकी ताकत समाप्त हो जाती है और आपका खजाना खर्च हो जाता है तो अन्य सरदार आपकी चरम स्थिति का लाभ उठाने के लिए मैदान में कूद पड़ेंगे। फिर कोई भी व्यक्ति, भले ही बहुत बुद्धिमान ही ना हो, उन परिणामों को टालने में सक्षम नहीं होगा जो सुनिश्चित होंगे।

शत्रु का माल लूट कर खाएं

इस प्रकार, यद्यपि हमने युद्ध में मूर्खता पूर्ण जल्दबाजी के बारे में सुना है, लेकिन उसमें लंबे विलंब को भी चतुराई नहीं मानी गयी है। कोई उदाहरण नहीं है कि लंबे युद्ध से कोई देश लाभान्वित हुआ है।  केवल वह जो युद्ध की बुराइयों से पूरी तरह परिचित है वही इसे लाभदायक तरीके से संचालित करना अच्छी तरह से समझ सकता है। (अर्थात्, लम्बे अभियान से किसी को भी किसी भी प्रकार से फायदा नहीं है।) Wage War to Win Wars of Life.

कुशल सैनिक दूसरी बार एकत्र नहीं होता, न ही उसकी आपूर्ति-वैगनों को दो बार से अधिक लोड किया जाता है।  घर से युद्ध सामग्री अपने साथ लायें लेकिन शत्रु का माल लूट कर खाएं। इस प्रकार सेना के पास अपनी आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त भोजन होगा। (अर्थात्, किसी भी अभियान या प्रोजेक्ट हेतु बार-बार  टीमें और संसाधन इकट्ठे नहीं किए जा  सकते हैं।)

खाली सरकारी खजाने के कारण एक सेना को दूर से योगदान देकर बनाए रखना होता है। दूरी पर बसी सेना को बनाए रखने में योगदान देने के कारण प्रजा गरीब हो जाती है। दूसरी ओर, एक सेना की निकटता के कारण कीमतें बढ़ जाती हैं; और ऊंचे दामों के कारण लोगों के पदार्थ खत्म हो जाते हैं। जब उनके पदार्थों को बर्बाद कर दिया जाता है तो किसान भारी और बलपूर्वक कर की मांग से दुखी हो जाएगा।

चीजों की इस हानि और ताकत की कमी के साथ, लोगों के घर खाली हो जाएंगे और उनकी आय के तीन-दसवें हिस्से का क्षरण हो जाएगा। जबकि टूटे हुए रथ, थके-पिटे घोड़े, स्तन-प्लेटें, हेलमेट, धनुष और तीर, भाले और ढाल, सुरक्षात्मक लबादे, थके बैलों और भारी माल-गाड़ियों के लिए सरकारी खर्च इसके कुल राजस्व का चार-दसवां हिस्सा होगा। इसलिए एक बुद्धिमान सेना दुश्मन को लूट कर खाती है। शत्रु के रसद की एक गाड़ी स्वयं की बीस के बराबर है और इसी तरह उसके खाद्य-पदार्थ की एक मुट्ठी अपने गोदाम की बीस के बराबर है। Wage War to Win Wars of Life.

अपना सर्वोपरि लक्ष्य विजय को रखें

शत्रु को मारने के लिए हमारे आदमियों को क्रोध के वशीभूत होना चाहिए; दुश्मन को हराने से फायदा हो तो उनको पुरस्कार दिया जाना चाहिए। इसलिए रथ की लड़ाई में, जब दस या अधिक रथ कब्ज़े कर लिए गए हों, तो उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए जिन्होंने पहले कब्ज़ा किया था। उन रथों पर हमारे स्वयं के झंडे को प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए और उन रथों को साथ मिलाकर हमारे उपयोग में लिया जाना चाहिए। पकड़े गए सैनिकों के साथ विनम्रता पूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए।

इसे कहते हैं पराजित शत्रु की सहायता से अपनी खुद की ताकत बढ़ाना तो युद्ध में आप अपना सर्वोपरि लक्ष्य विजय को रखें, लंबे अभियान को नहीं।  इस प्रकार यह ज्ञात होता है कि सेनाओं के सेनापतियों द्वारा प्रजा का भाग्य तय होता है और उसी  पर निर्भर करता है कि उनका राष्ट्र शांति से रहेगा या संकट में। Wage War to Win Wars of Life.

अध्याय 2: समाप्त

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