world-mirror-of-mental-states

विश्व आपकी मानसिक अवस्थाओं का आईना है

Posted by

जेम्स एलेन (James Allen) अपनी प्रसिद्ध कृति “दरिद्रता से शक्ति तक” (Poverty to Power) में कहते हैं: World is a Mirror of Mental States: यह विश्व आपकी मानसिक अवस्थाओं का आईना है। तुम जो हो, वही तुम्हारा संसार है। ब्रह्मांड में जो कुछ है वह आपके अपने आंतरिक अनुभव में ही है। यह बहुत कम मायने रखता है कि यह सब क्या है, क्योंकि यह सब आपकी अपनी चेतना की स्थिति का प्रतिबिंब है। जो आप भीतर हैं वही सब मायने रखता है क्योंकि उसी के अनुसार सब कुछ रंग लेकर प्रतिबिंबित होगा। वह सब जिसे आप सकारात्मक रूप से जानते हैं अपने अनुभव में निहित है; जो भी आप कभी भी जानेंगे उसे खुद का हिस्सा बनाने हेतु अनुभव के प्रवेश द्वार से गुजरना होगा।

आपके अपने विचारों, इच्छाओं और आकांक्षाओं में आपकी दुनिया शामिल है। और आप ब्रह्मांड में जिसमे भी सौंदर्य, खुशी और आनंद या कुरूपता, दुःख और दर्द आदि देखते है वे भी आपके भीतर ही समाहित है। अपने स्वयं के विचार की शक्ति द्वारा आप अपनी दुनिया, अपने ब्रह्मांड को निर्मित करते हैं या बर्बाद करते हैं, जैसा आप अपने भीतर विचार उठाते हैं आपका बाह्य जीवन और परिस्थितियां अपने आप ही उसके अनुरूप आकार ले लेती हैं। World is a Mirror of Mental States

आत्मा जो अशुद्ध, घिनौनी और स्वार्थी है, वह दुर्भाग्य और प्रलय की ओर तेजी के साथ आकर्षित हो रही है। जो आत्मा जो शुद्ध, निःस्वार्थ, और कुलीन है वह सुख और समृद्धि की और तेजी से बढ़ रही है। प्रत्येक आत्मा अपने जैसे को ही आकर्षित करती है और कुछ भी ऐसा संभवतः उसके पास नहीं आ सकता है जो उसके पास नहीं है। इसे महसूस करना ईश्वरीय नियम की सार्वभौमिकता को पहचानना है।

प्रत्येक मानव जीवन की घटनाएँ जो उसे बनाती हैं अथवा बर्बाद करती हैं वे अपने स्वयं के आंतरिक विचार की गुणवत्ता और शक्ति द्वारा उनकी ओर आकर्षित होती हैं। प्रत्येक आत्मा एकत्रित अनुभवों और विचारों का एक जटिल संयोजन है और शरीर अपनी अभिव्यक्ति के लिए एक तात्कालिक वाहन है।

इसलिए जो आपके विचार हैं वही आपका वास्तविक स्व है और चारों ओर की दुनिया, चेतन और निर्जीव दोनों ही आपके विचारों के चश्मे के रंग जैसे ही दिखते हैं। World is a Mirror of Mental States

बुद्ध ने कहा है, ”हम जो कुछ भी सोचते हैं उसी का उसका परिणाम है। यह हमारे विचारों द्वारा स्थापित है, यह हमारे विचारों से ही बना है।” तो यह इस प्रकार है कि यदि कोई आदमी खुश है तो इसलिए है क्योंकि वह खुश विचारों में रहता है, अगर वह दुखी है तो वह घृणित और दुर्बल विचारों में रहता है।

आपका वास्तविक स्व कौन है? Read More

Follow Rao TS

Sharing is Caring!

Leave a Reply

Your email address will not be published.