Art of War Nine Situaions

युद्ध की कला 11: नौ परिस्थितियाँ

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सैन्य रणनीतिकार सून त्ज़ु ने अध्याय 11 में कहा है: युद्ध की कला में मैदान की नौ किस्मों की पहचान उजागर होती है: (1) फैलाव का मैदान (2) सुगम मैदान (3) विवादास्पद मैदान (4) खुला मैदान; (5) राजमार्गों को जोड़ने का मैदान (6) गंभीर मैदान (7) कठिन मैदान (8) घिरा हुआ मैदान (9) हताश मैदान।

जब एक सरदार अपने ही क्षेत्र में लड़ रहा होता है, तो वह फैलाव वाला मैदान होता है।  जब वह शत्रु के क्षेत्र में प्रवेश कर गया है लेकिन कोई ज़्यादा दूरी तक नहीं गया है तो यह सुगम मैदान है।  जिस जमीन पर कब्जा करने से दोनों पक्षों को बहुत फायदा होता है वह विवादास्पद मैदान है। ऐसा मैदान जिस पर प्रत्येक पक्ष को आवागमन की स्वतंत्रता है वह खुला मैदान है। ऐसा मैदान जो तीन मिले हुए राज्यों की कुंजी है ताकि  जो इस पर पहले कब्जा कर लेता है उसकी कमान में सबसे अधिक साम्राज्य हो जाता है वह राजमार्गों को जोड़ने का मैदान है।

जब एक सेना ने एक शत्रु देश के बीच तक प्रवेश कर लिया हो और इसके पीछे कई गढ़वाले शहरों को छोड़ दिया हो तो यह गंभीर मैदान है।  पहाड़, जंगल, ऊबड़-खाबड़, ढलवां चढ़ाई, दलदल और कीचड़ आदि सभी क्षेत्र जिनको पार करना मुश्किल है: यह कठिन जमीन है। ऐसी जमीन जहाँ संकरी घाटियों से होकर पहुँचते पाते है और जहाँ से हम केवल यातना भरे रास्तों से ही लौट सकते हैं और  दुश्मन की एक छोटी संख्या भी हमारी भारी सेना को कुचलने के लिए पर्याप्त हो: यह घिरी हुई जमीन है। ऐसा मैदान जिस पर हम बिना किसी देरी किए लड़कर विनाश से बच सकते हैं वह हताश जमीन है।

किस मैदान पर कैसे लड़ना चाहिए ?

इसलिए फैलाने वाले मैदान पर लड़ना नहीं चाहिए। सुगम मैदान पर पड़ाव नहीं डालें और विवादास्पद जमीन पर हमला नहीं करना चाहिए। खुले मैदान में, दुश्मन के रास्ते को अवरुद्ध करने की कोशिश न करें। राजमार्गों के चौराहे की जमीन पर अपने सहयोगियों के साथ गठजोड़ करें।  गंभीर जमीन पर, लूट के माल को इकट्ठा करना हैं। कठिन मैदान में, लगातार मार्च पर आगे बढ़ते रहें।  घिरे हुए मैदान पर, नीति का सहारा लें। हताश जमीन पर लड़ाई करें।

जिन्हें पुराने  कुशल नेता कहा जाता था, वे जानते थे कि दुश्मन के सामने और पीछे एक कील या खूंटा कैसे ठोकना है ताकि दुश्मन के बड़े और छोटे डिवीजन के बीच सहयोग को रोका जा सके; अच्छे सैनिकों द्वारा बुरे सैनिकों को बचाने में अवरोध डाल सकें और अधिकारी गणो को अपने आदमियों को इकट्ठा करने से रोक सकें । जब दुश्मन के लोग एकजुट होते थे तो वे कुशल नेता उन्हें ( दुश्मनों) को अव्यवस्थित करने में कामयाब रहते थे । जब भी उनके लाभ का अवसर आता था तो वे आगे कदम बढ़ाया करते थे; अन्यथा वे जस-के-तस थम जाते थे।

युद्ध का सार क्या है ?

यदि उनसे पूछा जाए कि एक बहुत भारी शत्रु के साथ कैसे निपटा जाए और हमले के लिए कैसे आगे बढ़ा जाए तो जवाब होगा: “किसी ऐसी चीज को जब्त करने से शुरू करें जिसे आपका प्रतिद्वंद्वी प्रिय मानता है; तब वह आपके प्रति अड़ियल रुख नहीं अपनाएगा। ”

युद्ध का सार है तेजी; दुश्मन के तत्पर ना होने का लाभ उठाएं, अप्रत्याशित मार्गों से अपना रास्ता बनाएं, और असुरक्षित स्थानों पर हमला करें। निम्नलिखित सिद्धांत एक हमलावर बल द्वारा अपनाए जाने चाहिए: जितना अधिक आप एक देश में प्रवेश करते हैं, उतना ही अधिक आपके सैनिकों की एकजुटता होगी, और इस प्रकार रक्षक/दुश्मन आपके खिलाफ टिक नहीं पाएंगे।

सैनिक सब कुछ कर सकते हैं

अपनी सेना के भोजन की आपूर्ति हेतु उपजाऊ देश पर धावे बोलो।  अपने आदमियों की भलाई का ध्यान से अध्ययन करो और उन पर भारी बोझ मत डालो। अपनी ऊर्जा को एकाग्र करें और अपनी ताकत को जमा करें। अपनी सेना को लगातार आगे बढ़ाते रहें और अथाह योजनाओं को तैयार करें।  अपने सैनिकों को ऐसी परिस्थितियों में डालो जहां से कोई बच कर ना जाने पाए, तो वे पीछे भागने की बजाय मौत को प्राथमिकता देंगे। यदि वे मृत्यु का सामना करेंगे, तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो वे प्राप्त नहीं कर सकते हैं। अधिकारी और जवान समान रूप से अपनी पूरी ताकत लगा देंगे।

दुस्साहसिक परिस्थितियों में सैनिक भय का भाव खो देते हैं। यदि कोई आश्रय का स्थान नहीं है तो वे दृढ़ रहेंगे। यदि वे शत्रुतापूर्ण देश में हैं तो वे अपनी हठ दिखाएंगे। अगर उन्हें कोई मदद नहीं मिलेगी तो वे कड़ी लड़ाई लड़ेंगे।  इस प्रकार, बिना मोर्चे के इंतजार किए, सैनिक लगातार पैनी चौकसी पर रहेंगे; पूछे जाने की प्रतीक्षा किए बिना, वे आपकी इच्छा पूरी करेंगे; वे असीमित रूप से वफादार होंगे; आदेश दिए बिना उन पर भरोसा किया जा सकेगा।

अपशकुन और अंधविश्वासों को दूर करें। फिर, जब तक मृत्यु खुद नहीं आती तब तक किसी भी आपदा की आशंका नहीं है।  यदि हमारे सैनिकों के पास ढेर सा धन नहीं है, इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी धन में अरुचि है; यदि उनका जीवन बहुत लंबा नहीं है, तो ऐसा नहीं है कि वे दीर्घायु से विमुख हैं। जिस दिन उन्हें युद्ध करने का आदेश दिया जाता है, उस दिन तुम्हारे सैनिक दहाड़ें मारकर रो धो सकते हैं लेकिन उन्हें एक बार मैदान में जाने दो, और वे ज़बरदस्त, महा मानव जैसा साहस का प्रदर्शन करेंगे।

कुशल सेनापति और सेना का संचालन

कुशल रणनीतिज्ञ की तुलना शुआई-जान से की जा सकती है। शुई-जान एक सांप है जो चुंग पहाड़ों में पाया जाता है। उसके सिर पर प्रहार करो तो वह पूंछ से हमला करेगा; इसकी पूंछ पर प्रहार करें तो वह सिर से आप पर हमला करेगा ; इसके मध्य में मार करें तो वह सिर और पूंछ दोनों द्वारा हमला करेगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या सेना शुआई-जान की नकल कर सकती है, जवाब मिलेगा : “हां, कोई दो सेनाएँ शत्रु हैं; फिर भी अगर वे एक ही नाव में एक नदी को पार कर रहे हैं और एक तूफान से घिर जाते हैं, तो वे एक दूसरे की सहायता के लिए ऐसे आगे आएंगे जैसे कि बायाँ हाथ दाएं की मदद करता है।

इसलिए घोड़ों को खूंटे पर बांधना और रथ के पहियों को जमीन में गाड़ना ही किसी पर भरोसा करना हेतु पर्याप्त नहीं है। जिस सिद्धांत पर सेना का प्रबंधन करना है वह साहस के एक मानक को स्थापित करना है जो सभी हेतु एक होना चाहिए। कैसे मजबूत और कमजोर दोनों का सबसे अच्छा उपयोग करें – यह एक सवाल है जो मैदान के सही इस्तेमाल से जुड़ा है।इस प्रकार एक कुशल सेनापति अपनी सेना का संचालन वैसे ही करता है जैसे कि वह किसी एक अकेले सैनिक को उसकी अनिच्छा के बावजूद भी हाथ पकड़ कर ले जा रहा हो।

एक सेनापति को शांत रहना आवश्यक है जो गोपनीयता सुनिश्चित करता है; ईमानदार और न्यायपूर्ण रहकर वह व्यवस्था बनाए रखा सकता है।  वह अपने अधिकारियों और आदमियों को झूठी खबरों और दिखावे के जरिए रहस्यमय बना कर उन्हें पूरी तरह से अनभिज्ञ रखना चाहिए। अपनी व्यवस्थाओं और अपनी योजनाओं को बदलकर, वह दुश्मन को निश्चित ज्ञान पाने से रोकता है। अपने शिविर को स्थानांतरित करके और घुमावदार मार्गों पर चलकर , वह दुश्मन को उसके उद्देश्य का अनुमान लगाने से रोकता है।

नाज़ुक वक़्त में, एक सेना का नेता उस तरह से कार्य करता है जो ऊंचाई पर चढ़ गया है और फिर उसके पीछे सीढ़ी को गिरा देता है। वह अपना दांव दिखाने से पहले अपने लोगों को शत्रु के  क्षेत्र में ले जाता है।  वह अपनी नावें जला डालता है और अपने खाना पकाने के बर्तन तोड़ देता है। भेड़-बकरियों के झुंड को चलाने वाले चरवाहे की तरह, वह अपने आदमियों को इस तरह से चलाता है कि कोई कुछ भी नहीं जानता कि वे कहाँ जा रहे हैं। अपनी सेना को संगठित करना और उसे खतरे में डालना–इसे एक जनरल का काम कहा जा सकता है।

जमीन की नौ किस्मों के अनुकूल विभिन्न उपाय

जमीन की नौ किस्मों के अनुकूल विभिन्न उपाय; आक्रामक या रक्षात्मक रणनीति की आवश्यकता; और मानव प्रकृति के मूलभूत नियम: ये ऐसी चीजें हैं जिनका अध्ययन सबसे अधिक होना चाहिए।  शत्रु क्षेत्र पर आक्रमण करते समय, सामान्य सिद्धांत यह है कि गहराई से घुसना सामंजस्य लाता है; लेकिन एक छोटा प्रवेश बिखराव करेगा है। जब आप अपने देश को पीछे छोड़ते हैं, और अपनी सेना को पड़ोस के क्षेत्र में ले जाते हैं, तो आप खुद को विकट ज़मीन पर पाते हैं। जब चारों तरफ संचार के साधन होते हैं तो वह जमीन राजमार्गों में से एक है।

जब आप किसी देश में गहराई से प्रवेश करते हैं, तो यह गंभीर मैदान होता है। जब आप ज़रा सा प्रवेश करते हैं तो यह सुगम जमीन है।  जब आपके  पीछे दुश्मन के गढ़ होते हैं, और सामने से संकीर्ण मार्ग है तो यह घेराव का मैदान है। जब वहां कोई शरण नहीं होती है तो वह दुस्साहसिक मैदान होता है।

इसलिए, फैलाव वाले मैदान पर,  अपने लोगों को उद्देश्य की एकता के साथ रहना चाहिए। सुगम मैदान पर देखना चाहिए  कि अपनी सेना के सभी हिस्सों के बीच घनिष्ठ संबंध है।  विवादास्पद मैदान पर, मैं अपने पीछे वालों को जल्दी आगे लाऊंगा। खुले मैदान में, अपने बचाव पर तेज़ नजर रखनी होगी। राजमार्गों के चौराहों पर,  अपने गठबंधनों को मजबूत करना होगा।  गंभीर मैदान पर,  आपूर्ति की एक सतत धारा सुनिश्चित करने का प्रयास करें  मुश्किल जमीन पर,  सड़क पर सबको आगे धकेलते जाएं।

घेराव वाले मैदान पर, पीछे हटने के किसी भी तरीके को रोकना होगा। हताश जमीन पर, अपने सैनिकों को अपनी जान बचाने की कोई आशा या अर्थ नहीं होने की बात कहें।  क्योंकि एक सिपाही की प्रकृति होती है कि जब वह घिर जाता है और कोई चारा नहीं होता तो वह ज़बरदस्त तरीके से विरोध करके लड़ता है और जब वह खतरे में पड़ जाता है तो तुरंत आदेश का पालन करता है।

हम पड़ोसी राजकुमारों के साथ तब तक गठबंधन नहीं कर सकते जब तक हम उनके इरादों से परिचित नहीं हो जाते। हम तब तक मार्च पर सेना का नेतृत्व करने के लिए फिट नहीं हैं जब तक हम उस देश के भूगोल से परिचित नहीं होते हैं – इसके पहाड़ और जंगल, इसके गुप्त खतरे,  खड़ी चट्टानें और दलदल। जब तक हम स्थानीय गाइडों का उपयोग नहीं करेंगे, तब तक हम प्राकृतिक लाभों का फ़ायदा नहीं ले पाएंगे।

कैसा राजकुमार जंगजू हो सकता है?

निम्नलिखित चार-पाँच सिद्धांतों में से किसी एक को नजरंदाज करने वाला  राजकुमार जंगजू नहीं हो सकता है:

जब कोई लड़ाका राजकुमार एक शक्तिशाली राज्य पर हमला करता है, तो वह दुश्मन की सेना को एकत्र होने से रोकता है। वह अपने विरोधियों पर हावी हो जाता है और दुश्मन के सहयोगियों को उसके खिलाफ शामिल होने से रोक देता है इसलिए वह खुद को विविध के साथ सहयोगी बनाने का प्रयास नहीं करता है, न ही वह अन्य राज्यों की शक्ति को बढ़ावा देता है। वह अपने प्रतिपक्षी को खौफ में रखते हुए अपनी गुप्त योजनाएं तैयार करता है। इस प्रकार वह शहरों पर कब्जा और राज्यों को उखाड़ फेंकने में सक्षम होता है।

नियम की अनदेखी कर पुरस्कार प्रदान करो, पिछली व्यवस्था को देखे बिना आदेश जारी करो; इस प्रकार आप एक पूरी सेना को संभालने में ऐसे सक्षम होंगे जैसे कि आपको सिर्फ एक ही सैनिक को निपटना पड़ रहा हो।

अपने सैनिकों को अपने काम से रूबरू करवाएं ; उन्हें कभी भी अपने योजना का पता न लगने दें। जब उज्ज्वल स्थिति की संभावना हो तो इसे उनकी आंखों के सामने लाएं; लेकिन जब स्थिति मनहूस हो तो उन्हें कुछ नहीं कहें। अपनी सेना को घातक संकट में रखो, और वह जीवित रहेगी; उन्हें तंग हालात में डालो और वे सुरक्षित आ जाएंगे।  क्योंकि जब कोई सेना मुसीबत में गिर जाती है तो वह जीत के लिए एक प्रहार करने में सक्षम हो जाती है।

युद्ध में सफलता दुश्मन के उद्देश्य को ध्यान से समायोजित करके प्राप्त की जाती है।  शत्रु के मोर्चे पर लंबे समय तक लगातार डटे रहने से, हम सेनापति को मारने में सफल रहेंगे। इसे सरासर चालाकी द्वारा एक काम को पूरा करने की क्षमता कहा जाता है।

जिस दिन आप अपनी कमान संभालते हैं, सीमा को अवरुद्ध कर दें , आधिकारिक गणनाओं को नष्ट कर देवें, और सभी दूतों के मार्गों को रोक दें। परिषद-कक्ष में कठोर रहें, ताकि आप स्थिति को नियंत्रित कर सकें। यदि दुश्मन एक दरवाजा खुला छोड़ देता है, तो आपको तुरंत अंदर घुस जाना चाहिए। अपने प्रतिद्वंद्वी को रोकने हेतु उसकी पसंदीदा चीज/ज़मीन पर कब्ज़ा कर लें और मैदान पर उसके आगमन को आप नियंत्रित करें।

नियम से परिभाषित मार्ग पर चलो और अपने आप को दुश्मन के साथ समायोजित करो जब तक कि आप एक निर्णायक लड़ाई नहीं लड़ लेते।  शुरुआत में एक युवती सी लज्जा प्रदर्शित करें, जब तक कि दुश्मन आपको एक रास्ता न दे दे; बाद में एक दौड़ाक खरगोश की टूट पड़ें  तो दुश्मन को आपका सामना करने में बहुत देर हो चुकी होगी।

अध्याय 11: समाप्त 

Featured Image: Photo by Somchai Kongkamsri from Pexels Read English Text of The Art of War: HERE Copyright Ⓒ2021 Rao TS – All Rights Reserved

 

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