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युद्ध की कला 5: ऊर्जा

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सैन्य रणनीतिकार सून त्ज़ु ने अध्याय 5 में कहा है: सैद्धांतिक रूप से एक बड़ी ताकत का नियंत्रण कुछ पुरुषों के नियंत्रण के समान ही है–यह केवल उनकी संख्या को विभाजित करने का सवाल है। आपका एक बड़ी सेना को साथ लेकर लड़ना एक छोटी सेना लेकर लड़ने से कोई अलग नहीं है: यह केवल चिन्हों और संकेतों स्थापित करने का सवाल है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका पूरा लवाज़मा दुश्मन के हमले को सहन कर पाए और अविचलित भी ना हो — यह युद्धाभ्यास के दांव-पेंच से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होता है। यह कि आपकी सेना का प्रभाव एक सान के  पत्थर का अंडे से टकराने के जैसा हो — यह कमजोर बिंदुओं और मजबूत के विज्ञान द्वारा प्रभावित होता है।

जीत हेतु अप्रत्यक्ष रणनीति अपनाना

सभी लड़ाइयों में, प्रत्यक्ष पद्धति का उपयोग लड़ाई में शामिल होने के लिए किया जा सकता है लेकिन जीत हासिल करने के लिए अप्रत्यक्ष तरीकों की आवश्यकता होगी। कुशलता से लागू अप्रत्यक्ष रणनीति,  स्वर्ग और पृथ्वी की भाँति अटूट हैं, जो नदियों और नालों के प्रवाह के सामान अनंत हैं; सूर्य और चंद्रमा की तरह, वे समाप्त होते हैं लेकिन नए सिरे से शुरू करने के लिए; चार ऋतुओं की तरह, वे गुजर जाते हैं पर एक बार फिर लौटने के लिए ।

पाँच से अधिक संगीत के सुर नहीं हैं, फिर भी इन पाँचों के मिश्रण से इतनी धुनों को जन्म दिया जा सकता है कि आप ज़िन्दगी भर ना सून पाएं। पांच से अधिक प्राथमिक रंग (नीले, पीले, लाल, सफेद और काले) नहीं हैं, फिर भी संयोजन से वे इतने रंग पैदा करते हैं जिन्हें शायद ही देखा जा सके। पाँच से अधिक प्रमुख स्वाद (खट्टा, तीखा, नमक, मीठा, कड़वा) नहीं होते हैं, फिर भी उनके मेल से इतने जायके मिलते हैं कि सबका स्वाद कभी भी नहीं चख सकते हैं।

लड़ाई में, हमले के दो से अधिक तरीके नहीं हैं – प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष; फिर भी इन दोनों का संयोजन युद्ध में पैंतरेबाज़ी की एक अंतहीन श्रृंखला को जन्म देते हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक के बाद एक करके बारी-बारी से आते हैं। यह एक चक्र में गोल गोल घुमाने जैसा है – यह कभी भी समाप्त नहीं होता हैं। और उनके संयोजन की संभावनाओं को कौन समाप्त कर सकता है?

शुरुआत में भयानक, तत्पर और फुर्तीला होना

सैनिकों का आक्रमण एक तेज धारा की तरह है जो अपने रास्ते में पत्थरों को भी लुढ़का ले जाती है।  निर्णय की गुणवत्ता एक बाज़ का समयोचित झपट्टा मारने की तरह है जो इसे अपने शिकार को मारने और नष्ट करने में सक्षम बनाता है इसलिए अच्छा सेनानी शुरुआत में भयानक होगा और अपने फैसले लेने में तत्पर और फुर्तीला होगा।

ऊर्जा की तुलना खिंचाव से झुके हुए एक धनुष से की जा सकती है; निर्णय एक ट्रिगर को दबाने के सामान होता है। उथल-पुथल और लड़ाई के झगड़े के बीच, अव्यवस्था दिखाई पड़ सकती है पर कोई वास्तविक गड़बड़ी नहीं है; भ्रम और अराजकता के बीच, आपकी व्यूह रचना बिना सिर पैर के हो सकती है, फिर भी यह हार का कारण नहीं होगा।

जाली अव्यवस्था श्रेष्ठ अनुशासन को स्वयं सिद्ध करता है, नकली डर साहस को सिद्ध करता है; दिखावटी कमजोरी ताकत को दर्शाती है। अव्यवस्था के लबादे के नीचे छिपना केवल उप खंड ( अनेक भागों के भाग करना ) का सवाल है; कमजोरी दिखाने का स्वांग कर साहस को छिपाना एक अव्यक्त ऊर्जा भण्डार होना निर्धारित करता है; ताकत को कमजोरी के पीछे छिपाना एक चातुर्य पूर्ण स्वभाव द्वारा लागू किया जाता है।

इस प्रकार जो शत्रु को चलायमान रखने में निपुण है वह धोखेबाज दिखावे को बनाए रखता है, जिसके अनुसार शत्रु कार्य करेगा। वह कुछ बलिदान करता है ताकि दुश्मन उस पर झपट पड़े। प्रलोभन का चारा दिखाकर वह शत्रु को घुमाता रखता है; फिर वह चुनिन्दा आदमियों के साथ वह घात लगाकर उसकी प्रतीक्षा करता है।

चतुर लड़ाकू संयुक्त ऊर्जा के प्रभाव को देखता है, और अकेले या व्यक्तिगत की बहुत अधिक आवश्यकता नहीं होती है इसलिए उसे सही पुरुषों को चुनने और संयुक्त ऊर्जा का उपयोग करने की क्षमता होती है। जब वह संयुक्त ऊर्जा का उपयोग करता है, तो उसके लड़ाके वैसे ही हो जाते हैं जैसे कि लुढ़कते हुए लकड़ी के लट्ठे या पत्थर। क्योंकि एक लट्ठे या पत्थर की प्रकृति समतल ज़मीन पर गतिहीन रहना और ढलान पर लुढ़कना है; अगर चौकोर है तो ठहराव आएगा लेकिन अगर गोलाकार है नीचे लुढ़कता ही जाएगा।

इस प्रकार अच्छे योद्धाओं द्वारा एकत्रित ऊर्जा एक गोल पत्थर की गति के समान है जो हजारों फीट ऊँचाई के एक पर्वत से नीचे लुढ़क कर आता है। ऊर्जा के विषय पर इतना ही ।

अध्याय 5: समाप्त

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