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Adiyogi Shiva क्या शिव प्रथम योगी थे?

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Adiyogi Shiva: शिव के अनेकानेक नामों मे से एक नाम आदियोगी भी है जिसका अर्थ है “पहला योगी”, क्योंकि महादेव को योग के जनक व प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। शिव एक महान योगी है जो अपने आप में पूर्णत: लीन हैं। वह योगियों के भगवान हैं और ऋषियों के योग शिक्षक। शिव दक्षिणामूर्ति के रुप में सर्वोच्च गुरु हैं जो असीम शांति से “परम सत्य” (ब्रह्म) के साथ अपने अंतरतम (आत्मन) की एकात्मता को सिखाते हैं।

योग का सिद्धांत और अभ्यास, विभिन्न शैलियों में, हिंदू धर्म की सभी प्रमुख परंपराओं का हिस्सा रहा है और शिव कई हिंदू योग ग्रंथों में संरक्षक या प्रवक्ता रहे हैं—इनमें योग के लिए दर्शन और तकनीक शामिल हैं। ये विचार योग ग्रंथों जैसे कि ईश्वर गीता (शाब्दिक अर्थ ‘शिव का गीत’) के रूप में जीवित हैं जिनका हिंदू धर्म के विकास पर गहरा और स्थायी प्रभाव पड़ा है।

अन्य प्रसिद्ध शिव-संबंधित ग्रंथों ने हठ योग को प्रभावित किया तथा अद्वैतवादी (अद्वैत वेदांत) विचारों को योग दर्शन के साथ एकीकृत किया। शिव सूत्र, शिव संहिता और 10 वीं शताब्दी के कश्मीर शैव मत के विद्वान अभिनवगुप्त जैसे लोगों के विचार इस मान्यता के प्रमाण हैं।

अभिनवगुप्त ने शिव और योग से संबंधित विचारों की प्रासंगिकता के बारे में अपने नोट्स में लिखा है कि लोग अपने स्वयं के मामलों मे उलझे रहते हैं तथा सामान्यत: दूसरों के लिए कुछ भी नहीं करते हैं। जबकि शिव और योग की आध्यात्मिकता हमें भौतिक दुनिया से परे देखने में मदद करती है, अंतर्संबंध को समझने में सहायता करती है। और इस प्रकार व्यक्ति व दुनिया दोनों को अधिक आनंदमय अस्तित्व की स्थिति में लाने में विशेष भुमिका निभाती है। Adiyogi Shiva

॥ओऽम नम: शिवाय॥

शिव आदियोगी कैसे बने, ज्ञानवर्धक कहानी निचे देखें:

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Featured Image: Photo by Adi Yogi from Pexels

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